आज है राधा अष्टमी:आखिर क्यों मनाते है राधा अष्टमी

राधा अष्टमी को भगवान कृष्ण की आल्हादिनी शक्ति राधारानी के जन्म उत्सव के रूप में मनाया जाता है,

यह भर्तप्रद महीने की शुक्ल पक्ष के दौरान अष्टमी तिथी पर मनाया जाता है। श्री राधारानी का जन्मदिन श्री कृष्ण के जन्म के 15 दिनों बाद मनाया जाता है। इसे राधाष्टमी और राधा जयंती के रूप में भी जाना जाता है
राधा अष्टमी मनाने के पीछे इतिहास?
लोककथाओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने कृष्ण के रूप में ‘अवतार’ लिया, देवी लक्ष्मी ‘राधारानी ‘ के रूप में अवतरित हुई यह दिन राधारानी के जन्मदिवस का प्रतीक है।

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इस दिन किस मंत्र का करना चाहये उच्चारण :
“औम वृषभज्य्ये विदर्हे, कृष्णप्रिया दहेहही तन्नो राधा प्राचोदय”

इस दिन भक्त क्या करते हैं?
भक्त राधा अष्टमी के दिन पर उपवास रखते हैं। भक्त राधारानी को ‘धूप’, ‘कुमकुम’, ‘रौली’, ‘अक्षत’, फूल और ‘श्रृंगार’ अर्पण करते है। देवी राधा की मध्याना काल के दौरान पूजा की जाती है जो दोपहर का समय है।

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