क्यों नहीं चुना द्रौपदी ने कर्ण को अपना पति

क्यों नहीं चुना द्रौपदी ने कर्ण को अपना पति?

कर्ण द्रोपदी को पसंद करता था और उसे अपनी पत्नी बनाना चाहता था साथ ही द्रौपदी भी कर्ण से बहुत प्रभावित थी और उसकी तस्वीर देखते ही यह निर्णय कर चुकी थी कि वह स्वयंवर में उसी के गले में वरमाला डालेगी।

लेकिन फिर भी उसने ऐसा नहीं किया।

द्रोपदी और कर्ण, दोनों एक-दूसरे से विवाह करना चाहते थे लेकिन सूतपुत्र होने की वजह से यह विवाह नहीं हो पाया।

नियति ने इन दोनों का विवाह नहीं होने दिया, जिसके परिणामस्वरूप कर्ण, पांडवों से नफरत करने लगा।

द्रोपदी ने कर्ण के विवाह प्रस्ताव को ठुकरा दिया क्योंकि उसे अपने परिवार के सम्मान को बचाना था।

क्या आप जानते है द्रौपदी के विवाह प्रस्ताव को ठुकरा देने के बाद कर्ण ने दो विवाह किए थे।

चलिए आपको बताते हैं किन हालातों में किससे कर्ण ने विवाह किया था।

कर्ण ने किए थे दो विवाह

अविवाहित रहते हुए कुंती ने कर्ण को जन्म दिया था। समाज के लांछनों से बचने के लिए उसने कर्ण को स्वीकार नहीं किया।

कर्ण का पालन एक रथ चलाने वाले ने किया जिसकी वजह से कर्ण को सूतपुत्र कहा जाने लगा।

कर्ण को गोद लेने वाले उसके पिता आधीरथ चाहते थे कि कर्ण विवाह करे।

पिता की इच्छा को पूरा करने के लिए कर्ण ने रुषाली नाम की एक सूतपुत्री से विवाह किया। कर्ण की दूसरी पत्नी का नाम सुप्रिया था।

सुप्रिया का जिक्र महाभारत की कहानी में ज्यादा नहीं किया गया है। रुषाली और सुप्रिया से कर्ण के नौ पुत्र थे।

वृशसेन, वृशकेतु, चित्रसेन, सत्यसेन, सुशेन, शत्रुंजय, द्विपात, प्रसेन और बनसेन। कर्ण के सभी पुत्र महाभारत के युद्ध में शामिल हुए, जिनमें से 8 वीरगति को प्राप्त हो गए।

प्रसेन की मौत सात्यकि के हाथों हुई, शत्रुंजय, वृशसेन और द्विपात की अर्जुन, बनसेन की भीम, चित्रसेन, सत्यसेन और सुशेन की नकुल के द्वारा मृत्यु हुई थी।

वृशकेतु एकमात्र ऐसा पुत्र था जो जीवित रहा। कर्ण की मौत के पश्चात उसकी पत्नी रुषाली उसकी चिता में सती हो गई थी।

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