MahaShivratri Kab Ki Hai जानें शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि, कथा, मंत्र और आरती

Maha Shivratri 2020 महाशिवरात्रि कब है? जानें कब तक है पवित्र पर्व पूजा का मुहूर्त, कथा, मंत्र और आरती

शिवरात्रि शिव और शक्ति के अभिसरण का विशेष पर्व है। हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि के नाम से जाना जाता है।

पञ्चाङ्ग के अनुसार माघ माह की मासिक शिवरात्रि को महा शिवरात्रि कहते हैं। परन्तु पूर्णिमान्त पञ्चाङ्ग के अनुसार फाल्गुन माह की मासिक शिवरात्रि को महा शिवरात्रि कहते हैं। दोनों पञ्चाङ्गों में यह चन्द्र मास की नामाकरण प्रथा है जो इसे अलग-अलग करती है। हालाँकि दोनों, पूर्णिमान्त और अमान्त पञ्चाङ्ग एक ही दिन महा शिवरात्रि के साथ सभी शिवरात्रियों को मानते हैं।

इस पोस्ट में आप पड़ेगे: –
1)- MahaShivratri Kab Ki Hai जानें शुभ मुहूर्त महत्व पूजा विधि कथा मंत्र और आरती
2)- Mahashivratri kyu manaya jata hai | जानिए, क्यों मनाई जाती है शिवरात्रि
3)- महाशिवरात्रि का महत्व क्या है | जानिए, क्यों रखते हैं व्रत शिवरात्रि
4)- Maha shivratri व्रत के लिए समय, व्रत खोलने के लिए समय
5)- जानिए शिव के नंदी गण | Maha Shivratri 2020
6)- Maha shivratri व्रत के लिए समय, व्रत खोलने के लिए समय
7)- महाशिवरात्रि (Maha Shivratri) या सावन शिवरात्रि इस स्तुति से जल्द प्रसन्न होते है भोलेनाथ
8)- ये है शिव को खुश करने के सबसे सरल उपाय
9)- महाशिवरात्रि (Maha Shivratri) या सावन शिवरात्रि शिव को प्रसन करने के उपाय
10)- शिवजी की आरती | Shiv Ji Aarti in Hindi | Download PDF
11)- महाशिवरात्रि के सरलतम मनोकामना मंत्र

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Maha Shivaratri/Shivaratri in India Date and Time | महाशिवरात्रि शुभ मुहूर्त | Maha Shivratri kab hai

पौराणिक कथाओं के अनुसार महा शिवरात्रि के दिन मध्य रात्रि में भगवान शिव लिङ्ग के रूप में प्रकट हुए थे। महाशिवरात्रि हिन्दुओं का एक प्रमुख त्यौहार है। यह भगवान शिव का प्रमुख पर्व है।

फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी पर पड़ने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है | महाशिवरात्रि कितनी तारीख की है ? इस साल यह त्योहार शुक्रवार 21 फरवरी को मनाया जाएगा।

निशिथ काल पूजा- 24:08 से 25:00

पारण का समय- 06:57 से 15:23 (22 फरवरी)

चतुर्दशी तिथि आरंभ- 17:20 (21 फरवरी)

चतुर्दशी तिथि समाप्त- 19:02 (22 फरवरी)

mahashivratri kyu manaya jata hai | जानिए, क्यों मनाई जाती है शिवरात्रि

महाशिवरात्रि (Maha Shivaratri) हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है। इस दिन भगवान शंकर की शादी भी हुई थी। इसलिए रात में शंकर की बारात निकाली जाती है। Isliye मनाई जाती है शिवरात्रि | इस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से मनोकामना पूरी होती है। इसलिए लोग इस दिन लोग व्रत रखते हैं।

महाशिवरात्रि का महत्व क्या है | जानिए, क्यों रखते हैं व्रत शिवरात्रि

पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी पावन रात्रि को भगवान शिव ने संरक्षण और विनाश का सृजन किया था। इसी दिन भगवान शिव का विवाह देवी पार्वती के साथ हुआ था। साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है|

जानिए शिव के नंदी गण | Maha Shivratri 2020

1)- नंदी
2)- भृंगी
3)- रिटी
4)- टुंडी
5)- श्रृंगी
6)- नन्दिकेश्वर

Maha shivratri व्रत के लिए समय, व्रत खोलने के लिए समय :-

निशिथ काल पूजा- रात 12 बजकर 28 मिनट से 1 बजकर 18 मिनट तक (22 फरवरी 2020)

पारण का समय- सुबह 6 बजकर 57 मिनट से दोपहर 3 बजकर 23 मिनट तक (22 फरवरी)

चतुर्दशी तिथि आरंभ- सुबह 5 बजकर 20 मिनट से (21 फरवरी 2020)

चतुर्दशी तिथि समाप्त- अगले दिन 7 बजकर 2 मिनट तक (22 फरवरी 2020)

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महाशिवरात्रि (Maha Shivratri 2020) या सावन शिवरात्रि इस स्तुति से जल्द प्रसन्न होते है भोलेनाथ 

श्रीरामचरितमानस का ‘रुद्राष्टकम’ भक्‍तों पर जल्‍द प्रसन्‍न हो जाते हैं.

‘रुद्राष्टकम’ केवल गाने के लिहाज से ही नहीं, बल्कि भाव के नजरिए से भी एकदम मधुर है

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं । विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ॥

निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं । चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥1॥

(हे मोक्षरूप, विभु, व्यापक ब्रह्म, वेदस्वरूप ईशानदिशा के ईश्वर और सबके स्वामी शिवजी, मैं आपको नमस्कार करता हूं. निज स्वरूप में स्थित, भेद रहित, इच्छा रहित, चेतन, आकाश रूप शिवजी मैं आपको नमस्कार करता हूं.)

निराकारमोङ्कारमूलं तुरीयं । गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम् ।

करालं महाकालकालं कृपालं । गुणागारसंसारपारं नतोऽहम् ॥2॥

(निराकार, ओंकार के मूल, तुरीय (तीनों गुणों से अतीत) वाणी, ज्ञान और इन्द्रियों से परे, कैलाशपति, विकराल, महाकाल के भी काल, कृपालु, गुणों के धाम, संसार से परे परमेशवर को मैं नमस्कार करता हूं.)

तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभीरं । मनोभूतकोटिप्रभाश्री शरीरम् ॥

स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गा । लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥3॥

(जो हिमाचल के समान गौरवर्ण तथा गंभीर हैं, जिनके शरीर में करोड़ों कामदेवों की ज्योति एवं शोभा है, जिनके सिर पर सुंदर नदी गंगाजी विराजमान हैं, जिनके ललाट पर द्वितीया का चन्द्रमा और गले में सर्प सुशोभित है.)

चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं । प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ॥

मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं । प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि ॥4॥

(जिनके कानों में कुण्डल शोभा पा रहे हैं. सुन्दर भृकुटी और विशाल नेत्र हैं, जो प्रसन्न मुख, नीलकण्ठ और दयालु हैं. सिंह चर्म का वस्त्र धारण किए और मुण्डमाल पहने हैं, उन सबके प्यारे और सबके नाथ श्री शंकरजी को मैं भजता हूं.)

प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं । अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशं ॥

त्रय: शूलनिर्मूलनं शूलपाणिं । भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम् ॥5॥

(प्रचंड, श्रेष्ठ तेजस्वी, परमेश्वर, अखण्ड, अजन्मा, करोडों सूर्य के समान प्रकाश वाले, तीनों प्रकार के शूलों को निर्मूल करने वाले, हाथ में त्रिशूल धारण किए, भाव के द्वारा प्राप्त होने वाले भवानी के पति श्री शंकरजी को मैं भजता हूं.)

shiv ko prasan karne ke upaye

कलातीतकल्याण कल्पान्तकारी । सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी ॥

चिदानन्दसंदोह मोहापहारी । प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥6॥

(कलाओं से परे, कल्याण स्वरूप, प्रलय करने वाले, सज्जनों को सदा आनंद देने वाले, त्रिपुरासुर के शत्रु, सच्चिदानन्दघन, मोह को हरने वाले, मन को मथ डालनेवाले हे प्रभो, प्रसन्न होइए, प्रसन्न होइए.)

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न यावद् उमानाथपादारविन्दं । भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।

न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं । प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं ॥7॥

(जब तक मनुष्य श्रीपार्वतीजी के पति के चरणकमलों को नहीं भजते, तब तक उन्हें न तो इहलोक में, न ही परलोक में सुख-शान्ति मिलती है और अनके कष्टों का भी नाश नहीं होता है. अत: हे समस्त जीवों के हृदय में निवास करने वाले प्रभो, प्रसन्न होइए.)

ये है शिव को खुश करने के सबसे सरल उपाय (MahaShivRatri 2020 | 21st February 2020)

न जानामि योगं जपं नैव पूजां । नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भुतुभ्यम् ॥

जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानं । प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो ॥8॥

(मैं न तो योग जानता हूं, न जप और न पूजा ही. हे शम्भो, मैं तो सदा-सर्वदा आप को ही नमस्कार करता हूं. हे प्रभो! बुढ़ापा तथा जन्म के दु:ख समूहों से जलते हुए मुझ दुखी की दु:खों से रक्षा कीजिए. हे शम्भो, मैं आपको नमस्कार करता हूं.)

रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये ॥।

ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति ॥9॥

(जो मनुष्य इस स्तोत्र को भक्तिपूर्वक पढ़ते हैं, उन पर शम्भु विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं.)

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महाशिवरात्रि (Maha Shivratri) या सावन शिवरात्रि शिव को प्रसन करने के उपाय, shiv ko prasan karne ke upay janiye

इस दिन प्रातः काल स्नान—ध्यान से निव्रत होकर व्रत रखना चाहिए। पत्र, पुष्प तथा सुन्दर वस्त्रों से मण्डप तैयार करके सवतोभद्र की वेदी पर कलश की स्थापना के साथ-साथ गौरी शंकर की मूर्ति एवं नन्दी की मूर्ति रखनी चाहिए।

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भगवान शिव के कुल 12 नाम हैं. इन सबका अपना अलग-अलग महत्व है. इनके जाप से जीवन की तमाम परेशानियां खत्म हो जाती हैं. भगवान शिव त्रिदेवो में सबसे महत्वपूर्ण देवताओं में से एक है। इन्हें देवों के देव महादेव भी कहते हैं।

कलश को जल भरकर रोली, मौली, चावल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, चन्दन, दूध, दही, घी, शहद, कमलगट्टा, धतूरा, बिल्बपत्र आदि का प्रसाद शिवजी को अर्पित करके पूजा करनी चाहिए।

Shiv Bhagwan तुरंत होंगे प्रसन्न : 1)- सावन में रोज 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से ‘ॐ नम: शिवाय’ लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। इससे आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।

2)- सावन में रोज सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निपटकर समीप स्थित किसी शिव मंदिर में जाएं और भगवान शिव का जल से अभिषेक करें और उन्हें काले तिल अर्पण करें। इसके बाद मंदिर में कुछ देर बैठकर मन ही मन में ‘ॐ नम: शिवाय’ मंत्र का जाप करें। इससे मन को शांति मिलेगी।

शिवजी की आरती | Shiv Ji Aarti in Hindi | Download PDF

शिव आरती इस प्रकार है

ॐ जय शिव ओंकारा……
एकानन चतुरानन पंचांनन राजे |
हंसासंन ,गरुड़ासन ,वृषवाहन साजे॥

ॐ जय शिव ओंकारा……
दो भुज चारु चतुर्भज दस भुज अति सोहें |
तीनों रुप निरखता त्रिभुवन जन मोहें॥

ॐ जय शिव ओंकारा……
अक्षमाला ,बनमाला ,रुण्ड़मालाधारी |
चंदन , मृदमग सोहें, भाले शशिधारी ॥

ॐ जय शिव ओंकारा……
श्वेताम्बर,पीताम्बर, बाघाम्बर अंगें
सनकादिक, ब्रम्हादिक ,भूतादिक संगें

ॐ जय शिव ओंकारा……
कर के मध्य कमड़ंल चक्र ,त्रिशूल धरता |
जगकर्ता, जगभर्ता, जगसंहारकर्ता ॥

ॐ जय शिव ओंकारा……
ब्रम्हा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका |
प्रवणाक्षर मध्यें ये तीनों एका ॥

ॐ जय शिव ओंकारा……
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रम्हचारी |
नित उठी भोग लगावत महिमा अति भारी ॥

ॐ जय शिव ओंकारा……
त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावें |
कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावें ॥

ॐ जय शिव ओंकारा…..
जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा|
ब्रम्हा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा……

महाशिवरात्रि के सरलतम मनोकामना मंत्र

व्रत रखने वाले को फल, फूल, चंदन, बिल्व पत्र, धतूरा, धूप व दीप से रात के चारों प्रहर में शिवजी की पूजा करनी चाहिए |

दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अलग-अलग तथा सबको एक साथ मिलाकर पंचामृत से शिवलिंग को स्नान कराकर जल से अभिषेक करें।

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