नवरात्र 2017 तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा देवी पूजन विधि

नवरात्र 2017 तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा देवी पूजन विधि

माँ दुर्गा की तीसरा रूप चंद्रघंटा है। नवरात्र के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। माँ चन्द्रघण्टा का यह स्वरूप बेहद ही सुंदर, मोहक, अलौकिक शांतिदायक और कल्याणकारी है। माता चंद्रघंटा के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्रमाँ विराजमान है जिस कारण इन्हें चंद्र घंटा के नाम से जाना जाता है।

माता चन्द्रघंटा देवी का स्वरूप तपे हुए सोने के समान कांतिमय लगता है। माँ चंद्रघंटा के दस भुजाएं हैं और दसों हाथों में खड्ग, बाण सुशोभित है। ऐसी मान्यता है कि माता के घंटे की तेज व भयानक ध्वनि से दानव, और अत्याचारी राक्षस सभी बहुत डरते है देवी चंद्रघंटा अपने भक्तों को अलौकिक सुख देने वाली है। माता चंद्रघंटा का वाहन सिंह है और यह सिंह की सवारी करती है। यह हमेशा युद्ध के लिए तैयार रहने वाली मुद्रा में होती है। माँ चंद्रघंटा के गले में सफेद फूलों की माला रहती है।

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देवी चन्द्रघंटा की पूजा और भक्ति करने से आध्यात्मिक शक्ति मिलती है। नवरात्रि के तीसर दिन जो भी माता के तिसरे रूप माँ चन्द्रघण्टा की पूजा अर्चना करता है उन सभी को माता की कृपा प्राप्त होती है। नवरात्री के तीसरे दिन माता की पूजा के लिए सबसे पहले कलश की पूजा करके सभी देवी देवताओं और माता के परिवार के देवता, गणेश, लक्ष्मी, विजया, कार्तिकेय, देवी सरस्वती, एवं जया नामक योगिनी की पूजा करें उसके बाद फिर माता देवी चन्द्रघंटा की पूजा अर्चना करें। माँ की पूजा करने के बाद निम्न मंत्र का जाप करे

चंद्रघंटा Mantra
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।पिण्डज प्रवरारूढ़ाचण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते महयं चन्द्रघण्टेति विश्रुता।।
अर्थ : हे माँ! सर्वत्र विराजमान और चंद्रघंटा के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ। हे माँ, मुझे सब पापों से मुक्ति प्रदान करें।

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मां को लगाया जाने वाला भोग
नवरात्रि के तीसरे दिन माता की पूजा करते समय माता को दूध या दूध से बनी मिठाई और खीर का भोग लगाया जाता है। माँ को भोग लगाने के बाद दूध का दान भी किया जा सकता है और ब्रह्माण को भोजन करवा कर दक्षिणा दान में दे दें। माता चंद्रघंटा को शहद का भोग भी लगाया जाता है।

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