आइए जानते हैं कि इस साल कब है बसंत पंचमी तारीख व मुहूर्त

आइए जानते हैं कि इस साल कब है बसंत पंचमी (Vasant Panchami 2020) तारीख व मुहूर्त

Why do we celebrate Vasant Panchami (बसंत पंचमी)? हम वसंत पंचमी क्यों मनाते हैं?

वसंत पंचमी या श्रीपंचमी एक हिन्दू त्योहार है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है।
प्राचीन भारत और नेपाल में पूरे साल को जिन छह मौसमों में बाँटा जाता था उनमें वसंत लोगों का सबसे मनचाहा मौसम था।

 

इस लेख में आपको पढ़ने के लिए :

1)- What is meant by Vasant Panchami (बसंत पंचमी)?
2)- कब है बसंत पंचमी तारीख व मुहूर्त Vasant Panchami पर निबंध हिंदी में
3)- Why do we celebrate Vasant Panchami?
4)- What is meant by Vasant Panchami?
5)- Why do we wear yellow clothes on Vasant Panchami?
6)- Is Vasant Panchami auspicious?
7)- Who celebrates Basant Panchami?
8)- What is the history of Basant?
9)- What do we do on Basant Panchami?
10)- करें मां सरस्वती को प्रसन्न | Lord Saraswati please Mantra
11)- Learn बसंत पंचमी in Hindi Essay, Hindi Essay on Basant Panchami (Festival)
12)-Vasant Panchami 2020 History Of The Vasant Panchami

 

 

What is meant by Vasant Panchami (बसंत पंचमी)?

 

माँ सरस्वती की पूजा करने से अज्ञान भी ज्ञान की दीप जाते हैं! जब फूलों पर बहार आ जाती, खेतों में सरसों का सोना चमकने लगता, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगतीं, आमों के पेड़ों पर बौर आ जाता और हर तरफ़ रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडराने लगतीं। भर भर भंवरे भंवराने लगते। वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पाँचवे दिन एक बड़ा जश्न मनाया जाता था जिसमें विष्णु और कामदेव की पूजा होती, यह वसंत पंचमी का त्यौहार कहलाता था।

Why do we wear yellow clothes on Vasant Panchami? आइए जानते हैं वसंत पंचमी पर हम पीले कपड़े क्यों पहनते हैं?

इस दिन स्त्रियाँ पीले वस्त्र धारण करती हैं।

What is meant by Vasant Panchami and history of Basant बसंत पंचमी

 

Know What is the history of Basant? Basant Panchami Story – Basant Panchami Festival in Hindi

 

सरस्वती की आराधना का पर्व उपनिषदों की कथा के अनुसार सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान शिव की आज्ञा से भगवान ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की। लेकिन अपनी सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे, उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया रहता है।

“वसंत पंचमी” बसंत पंचमी की कथा | Vasant Panchami Maa Saraswati Story

तब ब्रह्मा जी ने इस समस्या के निवारण के लिए अपने कमण्डल से जल अपने अंजली में लेकर संकल्प स्वरूप उस जल को छिड़कर भगवान श्री विष्णु की स्तुति करनी आरम्भ की। ब्रम्हा जी के किये स्तुति को सुन कर भगवान विष्णु तत्काल ही उनके सम्मुख प्रकट हो गए और उनकी समस्या जानकर भगवान विष्णु ने आदिशक्ति दुर्गा माता का आव्हान किया। विष्णु जी के द्वारा आव्हान होने के कारण भगवती दुर्गा वहां तुरंत ही प्रकट हो गयीं तब ब्रम्हा एवं विष्णु जी ने उन्हें इस संकट को दूर करने का निवेदन किया।

Basant Panchami story in Hindi Part 2

Yha story Vasant Panchami Katha/ Story ha isme ब्रम्हा जी तथा विष्णु जी बातों को सुनने के बाद उसी क्षण आदिशक्ति दुर्गा माता के शरीर से स्वेत रंग का एक भारी तेज उत्पन्न हुआ जो एक दिव्य नारी के रूप में बदल गया। यह स्वरूप एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था जिनके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ में वर मुद्रा थे । अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी। आदिशक्ति श्री दुर्गा के शरीर से उत्पन्न तेज से प्रकट होते ही उन देवी ने वीणा का मधुरनाद किया जिससे संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गया। पवन चलने से सरसराहट होने लगी। तब सभी देवताओं ने शब्द और रस का संचार कर देने वाली उन देवी को वाणी की अधिष्ठात्री देवी “सरस्वती” कहा।

बसंत पंचमी Vasant Panchami Mythology – Saraswati Puja Legends Part 3

फिर आदिशक्ति भगवती दुर्गा ने ब्रम्हा जी से कहा कि मेरे तेज से उत्पन्न हुई ये देवी सरस्वती आपकी पत्नी बनेंगी, जैसे लक्ष्मी श्री विष्णु की शक्ति हैं, पार्वती महादेव शिव की शक्ति हैं उसी प्रकार ये सरस्वती देवी ही आपकी शक्ति होंगी। ऐसा कह कर आदिशक्ति श्री दुर्गा सब देवताओं के देखते – देखते वहीं अंतर्धान हो गयीं। इसके बाद सभी देवता सृष्टि के संचालन में संलग्न हो गए।

 

Why Saraswati Pujna On Basant Panchmi (बसंत पंचमी)

सरस्वती को वागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। ये विद्या और बुद्धि प्रदाता हैं। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण ये संगीत की देवी भी हैं। बसन्त पंचमी के दिन को इनके प्रकटोत्सव के रूप में भी मनाते हैं। ऋग्वेद में भगवती सरस्वती का वर्णन करते हुए कहा गया है

प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु।

अर्थात ये परम चेतना हैं। सरस्वती के रूप में ये हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं। हममें जो आचार और मेधा है उसका आधार भगवती सरस्वती ही हैं। इनकी समृद्धि और स्वरूप का वैभव अद्भुत है। पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण (Lord Krishna) ने सरस्वती (maa saraswati puja ) से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया था कि वसंत पंचमी के दिन तुम्हारी भी आराधना की जाएगी और तभी से इस वरदान के फलस्वरूप भारत देश में वसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती की भी पूजा होने लगी जो कि आज तक जारी है।

Vasant Panchami tradition and What we do on बसंत पंचमी

पतंगबाज़ी का वसंत से कोई सीधा संबंध नहीं है। लेकिन पतंग उड़ाने (Kite Flying Tradition) का रिवाज़ हज़ारों साल पहले चीन में शुरू हुआ और फिर कोरिया और जापान के रास्ते होता हुआ भारत पहुँचा।

बसंत पंचमी 2020 Date and Time | वसंत पंचमी मुहूर्त ( Vasant Panchami Muhurat 2020)

Know when is कब है बसंत पंचमी?

बसंत पंचमी – 29 जनवरी 2020
पूजा मुहूर्त – 10:45 से 12:35 बजे तक
पंचमी तिथि का आरंभ – 10:45 बजे से (29 जनवरी 2020)
पंचमी तिथि समाप्त – 13:18 बजे (30 जनवरी 2020) तक

 

बसंत पंचमी संबंधित अन्य नाम | Other names of Vasantpanchami

  1. बसंत पंचमी
  2. सरस्वती पंचमी
  3. सरस्वती पूजा
  4. श्री पंचमी

पीले रंग का महत्व

Know पीले रंग का महत् | Importance of Yellow color Basant Panchami

वसंत पंचमी के दिन उत्तर भारत के कई भागों में पीले रंग के पकवान बनाए जाते हैं. वसम्त ऋतु में चारों ओर अधिकतर पीले फूल दिखाई देते हैं. इस समय सरसों पक जाती है और उस पर पीले फूल खिले दिखाई देते हैं.

Basant Meaning in Hindi | Vasant Panchami meaning know it | बसंत का अर्थ है मादकता

बसंत का अर्थ है मादकता. बसंत का रंग भी बसंती रंग अर्थात पीला रंग माना गया है. यह रंग पीले रंग और नारंगी रंग के बीच का रंग होता है. इसलिए इस दिन इस पीले रंग का महत्व मानते हुए कई लोग पीले रंग का भोजन इस दिन करते हैं. पीले वस्त्र धारण करते हैं. हर तरफ उत्साह तथा खुशी का माहौल छाया रहता है. इस समय धरती पर उत्पादन क्षमता बढ़ जाती है. वृक्षों में नई कोंपलें आति है. पौधों पर नए फूल आते हैं. इस ऋतु को फूलों का मौसम भी कहा जा सकता है. इस समय ना तो ठण्ड होती है और ना ही गरमी होती है. इस समय तक आमों के वृक्षों पर आम के लिए मंजरी आनी आरम्भ हो जाती है.

कालिदास से जुडी कहानी on Vasant Panchami

एक अन्य किंवदंती जो बताती है कि वसंत पंचमी में देवी सरस्वती की पूजा करने का रिवाज लगभग 4 वीं शताब्दी ईसा पूर्व से है, जो भारतीय शास्त्रीय विद्वान कालीदास से जुड़ी है। कालिदास एक शास्त्रीय संस्कृत लेखक और एक महान कवि थे जो चौथी शताब्दी ईसा पूर्व से 5 वीं शताब्दी ईसा पूर्व के दौरान रहते थे।

किंवदंती है कि कालिदास एक मूर्ख व्यक्ति थे, जिन्होंने किसी तरह एक सुंदर राजकुमारी से शादी कर ली। यह जानने पर राजकुमारी कि कालिदास मूर्ख है, जिसके पास ज्ञान और ज्ञान का अभाव है; उसे लात मारी और उसके साथ रहने से इनकार कर दिया। प्यार और दिल टूटने के बाद कालीदास सरस्वती नदी में कूदकर आत्मदाह करने चले गए। लेकिन इससे पहले कि वह ऐसा कर पाता, देवी सरस्वती को उस पर दया आ गई और उन्होंने उसे पानी में डुबकी लगाने का आशीर्वाद दिया।

ऐसा करने के बाद देवी ने उन्हें बताया, कालीदास ने तत्काल परिवर्तन देखा और ज्ञानवान और गुणी बन गए। उन्होंने कविता लिखना शुरू किया और उनकी बुद्धि भारत के अन्य हिस्सों में फैल गई। इस प्रकार, वसंत पंचमी पर देवी सरस्वती पूजनीय हैं।

Basant Panchami 2020 ऐतिहासिक महत्व | Know वसंत ऋतू 2020 History

What is meant by Vasant Panchami and history of Basant बसंत पंचमी
वसंत पंचमी का दिन हमें पृथ्वीराज चौहान की भी याद दिलाता है। उन्होंने विदेशी हमलावर मोहम्मद ग़ोरी को 16 बार पराजित किया और उदारता दिखाते हुए हर बार जीवित छोड़ दिया, पर जब सत्रहवीं बार वे पराजित हुए, तो मोहम्मद ग़ोरी ने उन्हें नहीं छोड़ा। वह उन्हें अपने साथ अफगानिस्तान ले गया और उनकी आंखें फोड़ दीं। इसके बाद की घटना तो जगप्रसिद्ध ही है। मोहम्मद ग़ोरी ने मृत्युदंड देने से पूर्व उनके शब्दभेदी बाण का कमाल देखना चाहा। पृथ्वीराज के साथी कवि चंदबरदाई के परामर्श पर ग़ोरी ने ऊंचे स्थान पर बैठकर तवे पर चोट मारकर संकेत किया। तभी चंदबरदाई ने पृथ्वीराज को संदेश दिया।

चार बांस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण।
ता ऊपर सुल्तान है, मत चूको चौहान ॥

पृथ्वीराज चौहान

पृथ्वीराज चौहान ने इस बार भूल नहीं की। उन्होंने तवे पर हुई चोट और चंदबरदाई के संकेत से अनुमान लगाकर जो बाण मारा, वह मोहम्मद ग़ोरी के सीने में जा धंसा। इसके बाद चंदबरदाई और पृथ्वीराज ने भी एक दूसरे के पेट में छुरा भौंककर आत्मबलिदान दे दिया। (1192 ई) यह घटना भी वसंत पंचमी वाले दिन ही हुई थी।

वसंत पंचमी का लाहौर निवासी वीर हकीकत से भी गहरा संबंध है। एक दिन जब मुल्ला जी किसी काम से विद्यालय छोड़कर चले गये, तो सब बच्चे खेलने लगे, पर वह पढ़ता रहा। जब अन्य बच्चों ने उसे छेड़ा, तो दुर्गा मां की सौगंध दी। मुस्लिम बालकों ने दुर्गा मां की हंसी उड़ाई। हकीकत ने कहा कि यदि में तुम्हारी बीबी फातिमा के बारे में कुछ कहूं, तो तुम्हें कैसा लगेगा?बस फिर क्या था, मुल्ला जी के आते ही उन शरारती छात्रों ने शिकायत कर दी कि इसने बीबी फातिमा को गाली दी है। फिर तो बात बढ़ते हुए काजी तक जा पहुंची। मुस्लिम शासन में वही निर्णय हुआ, जिसकी अपेक्षा थी। आदेश हो गया कि या तो हकीकत मुसलमान बन जाये, अन्यथा उसे मृत्युदंड दिया जायेगा। हकीकत ने यह स्वीकार नहीं किया। परिणामत: उसे तलवार के घाट उतारने का फरमान जारी हो गया।

Vasant Panchami 2020 History part 3

कहते हैं उसके भोले मुख को देखकर जल्लाद के हाथ से तलवार गिर गयी। हकीकत ने तलवार उसके हाथ में दी और कहा कि जब मैं बच्चा होकर अपने धर्म का पालन कर रहा हूं, तो तुम बड़े होकर अपने धर्म से क्यों विमुख हो रहे हो? इस पर जल्लाद ने दिल मजबूत कर तलवार चला दी, पर उस वीर का शीश धरती पर नहीं गिरा। वह आकाशमार्ग से सीधा स्वर्ग चला गया। यह घटना वसंत पंचमी (23.2.1734) को ही हुई थी। पाकिस्तान यद्यपि मुस्लिम देश है, पर हकीकत के आकाशगामी शीश की याद में वहां वसन्त पंचमी पर पतंगें उड़ाई जाती है। हकीकत लाहौर का निवासी था। अत: पतंगबाजी का सर्वाधिक जोर लाहौर में रहता है।

वसंत पंचमी हमें गुरू रामसिंह कूका की भी याद दिलाती है। उनका जन्म 1816 ई. में वसंत पंचमी पर लुधियाना के भैणी ग्राम में हुआ था। कुछ समय वे महाराजा रणजीत सिंह की सेना में रहे, फिर घर आकर खेतीबाड़ी में लग गये, पर आध्यात्मिक प्रवष्त्ति होने के कारण इनके प्रवचन सुनने लोग आने लगे। धीरे-धीरे इनके शिष्यों का एक अलग पंथ ही बन गया, जो कूका पंथ कहलाया।

वसंत पंचमी 2020 History part 4

गुरू रामसिंह, गोरक्षा, स्वदेशी, नारी उद्धार, अन्तरजातीय विवाह, सामूहिक विवाह आदि पर बहुत जोर देते थे। उन्होंने भी सर्वप्रथम अंग्रेजी शासन का बहिष्कार कर अपनी स्वतंत्र डाक और प्रशासन व्यवस्था चलायी थी। प्रतिवर्ष मकर संक्रांति पर भैणी गांव में मेला लगता था। 1872 में मेले में आते समय उनके एक शिष्य को मुसलमानों ने घेर लिया। उन्होंने उसे पीटा और गोवध कर उसके मुंह में गोमांस ठूंस दिया। यह सुनकर गुरू रामसिंह के शिष्य भड़क गये। उन्होंने उस गांव पर हमला बोल दिया, पर दूसरी ओर से अंग्रेज सेना आ गयी। अत: युद्ध का पासा पलट गया।

इस संघर्ष में अनेक कूका वीर शहीद हुए और 68 पकड़ लिये गये। इनमें से 50 को सत्रह जनवरी 1872 को मलेरकोटला में तोप के सामने खड़ाकर उड़ा दिया गया। शेष 18 को अगले दिन फांसी दी गयी। दो दिन बाद गुरू रामसिंह को भी पकड़कर बर्मा की मांडले जेल में भेज दिया गया। 14 साल तक वहां कठोर अत्याचार सहकर 1885 ई. में उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया।

बसंत पंचमी in Hindi Essay, Hindi Essay on Basant Panchami (Festival)

Hindi Essay on “Basant Panchmi” : Vasant पंचमी मुख्य रूप से पूर्वी भारत में मनाया जाता है जो कि लोगों को हर्ष और उल्लास से भर जाता है। यह प्रत्येक वर्ष माघ के माह की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। बसंत पंचमी को श्रीपंचमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन खेतों में पीली सरसों की फसलें लहलहाती हुई नजर आती हैं जो कि बहुत ही मनमोहक लगती है। इस समय शरद रितु खत्म होने लगती है और पेड़ो पर नए पत्ते और फूल उगने लगते हैं। बसंत पंचमी के दिन ही हिंदुओं के अनुसार बच्चों के शिक्षण कार्य की शुरूआत की जाती है। इस दिन बच्चे से पहला अक्षर लिखवाया जाता है। स्कूलों और कॉलेजों में भी सरस्वती पूजा का आयोजन किया जाता है। मूर्ति पूजा कर उसका विसर्जन किया जाता है। बहुत से स्थानों पर बसंत पंचमी के त्योहार के उपलक्ष्य में मेले लगाए जाते हैं।

Basant Panchmi Par Nibandh | बसंत पंचमी पर निबंध हिंदी में

इस दिन विद्या की देवी सरस्वती (Devi Saraswathi Devi) की पूजा की जाती है। सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्माजी ने मनुष्य योनि की रचना की, परंतु वह अपनी सर्जना से संतुष्ट नहीं थे, तब उन्होंने विष्णु जी से आज्ञा लेकर अपने कमंडल से जल को पृथ्वी पर छि़ड़क दिया, जिससे पृथ्वी पर कंपन होने लगा और एक अद्भुत शक्ति के रूप में चतुर्भुजी सुंदर स्त्री प्रकट हुई। जिनके एक हाथ में वीणा एवं दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। वहीं अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी। जब इस देवी ने वीणा का मधुर नाद किया तो संसार के समस्त जीव-जंतुओं को वाणी प्राप्त हो गई, तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। (बसंत पंचमी एस्से इन हिंदी )

बसंत पंचमी हिंदी निबंध mein पर्व का महत्व

बसंत पंचमी पर निबंध कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 & 10 के विद्यार्थियों के लिए है। प्राचीनकाल से इसे ज्ञान और कला की देवी माँ सरस्वती का जन्मदिवस माना जाता है, इसलिए इस दिन मां शारदे की पूजा कर उनसे ज्ञानवान, विद्यावान होने की कामना की जाती है। वहीं कलाकारों में इस दिन का विशेष महत्व है। कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार, नृत्यकार अपने उपकरणों की पूजा के साथ मां सरस्वती की वंदना करते हैं।

करें मां सरस्वती को प्रसन्न | Lord Saraswati please Mantra

वसंत पंचमी को सभी शुभ कार्यों के लिए अत्यंत शुभ मुहूर्त माना गया है। मुख्यतयाः विद्यारंभ ,नवीन विद्या प्राप्ति एवं गृह-प्रवेश के लिए वसंत पंचमी को पुराणों में भी अत्यंत श्रेयकर माना गया है। महाकवि कालिदास ने ऋतुसंहार नामक काव्य में इसे ”सर्वप्रिये चारुतर वसंते” कहकर अलंकृत किया है। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने ”ऋतूनां कुसुमाकराः” अर्थात मैं ऋतुओं में वसंत हूँ कहकर वसंत को अपना स्वरुप बताया है।

सरस्वती माता के नाम से
‘ॐ श्री सरस्वतयै नम: स्वाहा’
इस मंत्र से 108 बार हवन करें। हवन के बाद सरस्वती माता की आरती करें और हवन की भभूत मस्तक पर लगाएं।

अक्षर ज्ञान कराने का शुभ दिन

Basant panchami की देवी सरस्वती का दिन होने से वसंत पंचमी के दिन छोटे बच्चों को अक्षर ज्ञान कराया जाता है। In School and colleges and शिक्षा संकायों में सरस्वती पूजन किया जाता है तथा ज्ञान वृद्धि के लिए कामना की जाती है। वहीँ गुरुद्वारों में इस दिन राग वसंत में गुरुवाणी (Guruvani shabd) के कीर्तन द्वारा श्रद्धालुओं में भावना जागृत की जाती है।

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